सन्मान दया, सन्मान घ्या !

2018-04-06T18:20:53+00:00July 27th, 2017|Marathi, Newspaper Articles|

खुद जो बदलाव बनिए जो चुहिया में (माप
देखना चाहते हैं ! महात्मा गांधी जी का यह
उद्धरण आज के परिदृश्य में सामाजिक
परिवर्तन लाने में बड़ महत्वपूर्ण है क्योंकि
आज हर कोई बडी बेसब्री है पहले दूसरों के
परिवर्तन काइंतज़ग्ररकररहाहैँऔरफिरउसके
पश्चात यदकेर्थारेवर्तन केबारे में सोच रहा है .
हालांकियहकाफी दुखद बात हैकिहम सभी
परिवर्तन की प्रक्रिया में खुदको बिलकूल
आखिरी में खड़। करते हैं लेकिन दूसरों को
पहले आप-पहले आप कहकर आगे खड़ब्व
रखते है भला ऐसा क्यों करते हैं इम सभी ?
क्योंकिहम सभी अपने चश्ये से ही दुनिया क्रो
देखनायसंदलरतेहैंसलिएअधिकांशत्ल
अंदामनेललेशेश्चिरेवर्तनाकी अपेक्षब्बसदैब
रहतीहैँनकीरवुदसे. इसबातमेंक्रोईदोराय
नहींहैँकीहमसभो अपने-जीवनमे-बदलने

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